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Ajay Zapadiya
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Andaaz-E-Aviz

This ghazal weaves themes of freedom, introspection, and individuality.

वो माहिर नहीं है रदीफ़-क़ाफ़िया के खेल में,
उसको रेहना भी नहीं है बहर की जेल में | 1

बहुत ध्यानसे चलाना वाक्बाण मेरे दोस्त,
अब धड़कन भी नहीं है घायल वो दिल में |

संवेदना और संगीत का प्यारा सा पूल,
शिद्दत से बना रहा है वो अपने सिर में |

जब से मिली है उसे शक्ति वर्तमान की
तब से नहीं घूमता वो भूतो-भविष्य में | 2

दुनिया के उस्सूलो से इतना वाकेफ़ नहीं है वो,
अभी तो मग्न है ‘अविझ’ अपने अंदाज़ में |

Footnotes

  1. (रदीफ़-क़ाफ़िया or बहर) are traditional rules of rhyme and rhythm .

  2. I got this inspiration from the book Power of Now - Eckhart Tolle


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