This ghazal weaves themes of freedom, introspection, and individuality.
वो माहिर नहीं है रदीफ़-क़ाफ़िया के खेल में,
उसको रेहना भी नहीं है बहर की जेल में | 1
बहुत ध्यानसे चलाना वाक्बाण मेरे दोस्त,
अब धड़कन भी नहीं है घायल वो दिल में |
संवेदना और संगीत का प्यारा सा पूल,
शिद्दत से बना रहा है वो अपने सिर में |
जब से मिली है उसे शक्ति वर्तमान की
तब से नहीं घूमता वो भूतो-भविष्य में | 2
दुनिया के उस्सूलो से इतना वाकेफ़ नहीं है वो,
अभी तो मग्न है ‘अविझ’ अपने अंदाज़ में |